Roti Shayari Status In Hindi 2021

Roti Shayari Status In Hindi 2021: दोस्तों आज मैं आप लोगों के लिए रोटी पर शायरी लेकर आया हूं या फिर यूं कहे की रोटी स्टेटस टेक्स्ट एसएमएस आदि।


दोस्तों यहां पर हम रोटी की कीमत दोस्तों यहां पर हम रोटी की कीमत और रोटी से रिलेटेड जितने भी शायरियां स्टेटस आदि बनते हैं।


Roti Shayari Status In Hindi 2021
Roti Shayari Status In Hindi 2021



वह सब यहां पर आप लोगों को मिल जाएंगे दाल रोटी से रिलेटेड शायरी मेहनत की रोटी गरीब की रोटी भूखे बच्चे पर शायरी आज ही का संपूर्ण भंडारण यहां पर मौजूद है।


यहां पर आप लोगों को टेक्स्ट के साथ-साथ इमेजेस भी मिल जाएगी वह भी शायरी के साथ।


Roti Shayari Status In Hindi 2021


Roti Shayari Status In Hindi 2021 ,सुखी रोटी को भी बाँट कर खाते हुये देखा मैंने, सड़क किनारे वो भिखारी शहंशाह निकला।


सुखी रोटी को भी बाँट कर खाते हुये देखा मैंने,
सड़क किनारे वो भिखारी शहंशाह निकला।

Sukhee Rotee Ko Bhee Baant Kar Khaate Huye Dekha Mainne,
Sadak Kinaare Vo Bhikhaaree Shahanshaah Nikala.


Roti Shayari Status In Hindi 2021 , कतार बहुत लम्बी थी इस लिए सुबह से रात हो गयी,  ये दो वक़्त की रोटी आज फिर मेरा अधूरा ख्वाब हो गयी।



कतार बहुत लम्बी थी इस लिए सुबह से रात हो गयी,

ये दो वक़्त की रोटी आज फिर मेरा अधूरा ख्वाब हो गयी। 


Kataar Bahut Lambee Thee Is Lie Subah Se Raat Ho Gayee, 

Ye Do Vaqt Kee Rotee Aaj Phir Mera Adhoora Khvaab Ho Gayee.



Roti Shayari Status In Hindi 2021, फेंक रहे हो तुम खाना क्योंकि आज रोटी थोड़ी सुखी हैं।  थोड़ी इज्जत से फेंकना साहब मेरी बेटी कल से भूखी हैं।



फेंक रहे हो तुम खाना क्योंकि आज रोटी थोड़ी सुखी हैं।

थोड़ी इज्जत से फेंकना साहब मेरी बेटी कल से भूखी हैं।


Phenk Rahe Ho Tum Khaana Kyonki Aaj Rotee Thodee Sukhee Hain. 

Thodee Ijjat Se Phenkana Saahab Meree Betee Kal Se Bhookhee Hain.





Roti Shayari Status In Hindi 2021, गरीब के गुनाहों का हिसाब क्या खुदा लेगा,  जिसने गिन-गिन कर पूरी जिन्दगी रोटी खाई हो।



गरीब के गुनाहों का हिसाब क्या खुदा लेगा,

जिसने गिन-गिन कर पूरी जिन्दगी रोटी खाई हो। 


Gareeb Ke Gunaahon Ka Hisaab Kya Khuda Lega, 

Jisane Gin-gin Kar Pooree Jindagee Rotee Khaee Ho.



Roti Shayari Status In Hindi 2021, वो राम की खिचड़ी भी खाता है,  रहीम की खीर भी खाता है।   वो भूखा है जनाब उसे,  कहाँ मजहब समझ आता है।



वो राम की खिचड़ी भी खाता है,

रहीम की खीर भी खाता है। 

वो भूखा है जनाब उसे,

कहाँ मजहब समझ आता है। 


Vo Raam Kee Khichadee Bhee Khaata Hai, 

Raheem Kee Kheer Bhee Khaata Hai. 

Vo Bhookha Hai Janaab Use, 

Kahaan Majahab Samajh Aata Hai.



Roti Shayari Status In Hindi 2021 ,अमीरी नशा करके पड़ा है कचरे के ढेर में,  गरीबी रोटी ढूँढने निकला है कचरे के ढेर में।



अमीरी नशा करके पड़ा है कचरे के ढेर में,

गरीबी रोटी ढूँढने निकला है कचरे के ढेर में। 


Ameeree Nasha Karake Pada Hai Kachare Ke Dher Mein,

Gareebee Rotee Dhoondhane Nikala Hai Kachare Ke Dher Mein।



इक गरीब दो रोटी में पूरा जीवन गुजार देता है,

वो ख्वाहिशों को पालता नहीं है… उन्हें मार देता है। 


Ik Gareeb Do Rotee Mein Poora Jeevan Gujaar Deta Hai, 

Vo Khvaahishon Ko Paalata Nahin Hai… Unhen Maar Deta Hai.


रोटी के लिए शायरी


उस मासूम की रोटी की आखिरी उम्मीद तब टूटी,

जब बड़े साहब ने चढ़ा कर सीसा कार आगे बढ़ा दी। 


Us Maasoom Kee Rotee Kee Aakhiree Ummeed Tab Tootee, 

Jab Bade Saahab Ne Chadha Kar Seesa Kaar Aage Badha Dee.



रोटी कमाना बड़ी बात नही है,

परिवार के साथ बैठकर खाना बड़ी बात है। 


Rotee Kamaana Badee Baat Nahee Hai, 

Parivaar Ke Saath Baithakar Khaana Badee Baat Hai.


माँ के हाथ की रोटी शायरी


Maa Ke Hath Ki Roti Shayari , जब घर में खुश होती है माँ बहू और बेटियाँ,  तभी घर में मिलती है सुकून की रोटियाँ।
माँ के हाथ की रोटी शायरी



जब घर में खुश होती है माँ बहू और बेटियाँ,

तभी घर में मिलती है सुकून की रोटियाँ। 


Jab Ghar Mein Khush Hotee Hai Maa Bahoo Aur Betiyaan, 

Tabhee Ghar Mein Milatee Hai Sukoon Kee Rotiyaan.



Maa Ke Hath Ki Roti Shayari, माँ के हाथों से बनी रोटी बहुत याद आती है,  जब अपने हाथों से रोटी बनानी पड़ जाती है।



माँ के हाथों से बनी रोटी बहुत याद आती है,

जब अपने हाथों से रोटी बनानी पड़ जाती है। 


Maa Ke Haathon Se Banee Rotee Bahut Yaad Aatee Hai, 

Jab Apane Haathon Se Rotee Banaanee Pad Jaatee Hai.



Maa Ke Hath Ki Roti Shayari, पूछा माँ से प्यार क्या है !  तू, मैं, तेरे भाई और पिता, दाल -रोटी और एक छत।



पूछा माँ से प्यार क्या है !

तू, मैं, तेरे भाई और पिता, दाल -रोटी और एक छत। 


Poochha Maa Se Pyaar Kya Hai ! Too, 

Main, Tere Bhaee Aur Pita, Daal -rotee Aur Ek Chhat.



Maa Ke Hath Ki Roti Shayari, भूख तो एक रोटी से भी मिट जाती माँ ,  अगर थाली की वो एक रोटी तेरे हाथ की होती ।



भूख तो एक रोटी से भी मिट जाती माँ ,

अगर थाली की वो एक रोटी तेरे हाथ की होती ।


Bhookh To Ek Rotee Se Bhee Mit Jaatee Maan , 

Agar Thaalee Kee Vo Ek Rotee Tere Haath Kee Hotee .



Maa Ke Hath Ki Roti Shayari, तलाश रोटी के सफर में मुझसे दूर मत होना माँ ,  बताऊंगा भूख को की तू मेरी माँ से बढ़कर नही ।



तलाश रोटी के सफर में मुझसे दूर मत होना माँ ,

बताऊंगा भूख को की तू मेरी माँ से बढ़कर नही ।


Talaash Rotee Ke Saphar Mein Mujhase Door Mat Hona Maan , 

Bataoonga Bhookh Ko Kee Too Meree Maan Se Badhakar Nahee .



पिता को दिनभर चलाती रही ये रोटी ,

माँ को दिन भर थकाती रही ये रोटी ,

बच्चो को दूर शहर नचाती रही ये रोटी ,

ना जाने क्या-क्या कमाल दिखाती रही ये रोटी ।


Pita Ko Dinabhar Chalaatee Rahee Ye Rotee , 

Maan Ko Din Bhar Thakaatee Rahee Ye Rotee , 

Bachcho Ko Door Shahar Nachaatee Rahee Ye Rotee , 

Na Jaane Kya-kya Kamaal Dikhaatee Rahee Ye Rotee .



आजकल  रोटी के पीछे भागता हूँ ,

तो याद आता है मुझे ,मेरा बचपन जब ,

रोटी खिलाने के लिए माँ मेरे पीछे भागती थी। 


Aajakal Rotee Ke Peechhe Bhaagata Hoon ,

To Yaad Aata Hai Mujhe ,mera Bachapan Jab , 

Rotee Khilaane Ke Lie Maan Mere Peechhe Bhaagatee Thee.



प्रेम का अर्थ मुझे उस वक्त समझ में आया ,

जब माँ ने आधा रोटी भी बांट कर खाया ।


Prem Ka Arth Mujhe Us Vakt Samajh Mein Aaya , 

Jab Maan Ne Aadha Rotee Bhee Baant Kar Khaaya .



तेरी  टिफन की वो दो रोटि कही पे बिकती नही,

माँ मेंहगे ढाबो  में आज भूख मिटती नही। 


Teree Tiphan Kee Vo Do Roti Kahee Pe Bikatee Nahee, 

Maan Menhage Dhaabo Mein Aaj Bhookh Mitatee Nahee.


मां की रोटी शायरी


जब एक रोटी के चार टुकड़े हो और खाने वाले पांच ,

तब मुझे भूख नही है ,

ये कहने वाली सिर्फ माँ होती है ।


Jab Ek Rotee Ke Chaar Tukade Ho Aur Khaane Vaale Paanch , 

Tab Mujhe Bhookh Nahee Hai , 

Ye Kahane Vaalee Sirph Maan Hotee Hai .



तन जलाकर रोटींया पकाती है माँ ,

नादान बच्चे आचार पर रूठ जाते है ।


Tan Jalaakar Roteenya Pakaatee Hai Maan , 

Naadaan Bachche Aachaar Par Rooth Jaate Hai .



माँ मेरी खातिर तेरा रोटी पकाना याद आता है ,

अपने हाथों को चुल्हे में जलाना याद आता है ।


Maan Meree Khaatir Tera Rotee Pakaana Yaad Aata Hai , 

Apane Haathon Ko Chulhe Mein Jalaana Yaad Aata Hai .


Maa Ke Hath Ki Roti Shayari

तुम क्या सिखाओगे मुझे ,

प्यार करने का सलीका ,

मैने माँ के एक हाथ से थप्पड़ ,

दूसरे से रोटी खाई है ।


Tum Kya Sikhaoge Mujhe , 

Pyaar Karane Ka Saleeka , 

Maine Maan Ke Ek Haath Se Thappad , 

Doosare Se Rotee Khaee Hai .



तेरी डिब्बे की वो दो रोटियां कही बिकती नही ,

माँ मेंहगे होटलो में आज भी भूख नही मिटती ।


Teree Dibbe Kee Vo Do Rotiyaan Kahee Bikatee Nahee , 

Maan Menhage Hotalo Mein Aaj Bhee Bhookh Nahee Mitatee .



दो वक्त की रोटी शायरी


Do Waqt Ki Roti Shayari, बिकते देखे है यहां जिंदगी  अमीरों के हाथों में ,  कही गरीब इंसान के लिए दो वक्त  का खाना और   अनाज और कपड़े  खरीदना मुश्किल होता जा रहा है ।
Do Waqt Ki Roti Shayari



बिकते देखे है यहां जिंदगी  अमीरों के हाथों में ,

कही गरीब इंसान के लिए दो वक्त  का खाना और 

अनाज और कपड़े  खरीदना मुश्किल होता जा रहा है ।


Bikate Dekhe Hai Yahaan Jindagee Ameeron Ke Haathon Mein , 

Kahee Gareeb Insaan Ke Lie Do Vakt Ka Khaana Aur Anaaj Aur 

Kapade Khareedana Mushkil Hota Ja Raha Hai .



जले पे नमक तो सब लगाने आयेंगे लेकिन,

रोटी पे मक्खन कोई नहीं लगाता  है। 


Jale Pe Namak To Sab Lagaane Aayenge Lekin, 

Rotee Pe Makkhan Koee Nahin Lagaata Hai.



Do Waqt Ki Roti Shayari, मसीहा के नाम पर लोगों को लूटने वालो, कभी किसी ,  जरूरतमंद इंसान को दो वक्त की रोटी खिला के देख,   उसकी भूख मिट जाएगी और तुम्हें दुवाये मिल जाएगी।



मसीहा के नाम पर लोगों को लूटने वालो, कभी किसी ,

जरूरतमंद इंसान को दो वक्त की रोटी खिला के देख,

 उसकी भूख मिट जाएगी और तुम्हें दुवाये मिल जाएगी। 


Maseeha Ke Naam Par Logon Ko Lootane Vaalo, Kabhee Kisee , 

Jarooratamand Insaan Ko Do Vakt Kee Rotee Khila Ke Dekh, 

Usakee Bhookh Mit Jaegee Aur Tumhen Duvaaye Mil Jaegee.



Do Waqt Ki Roti Shayari , जिन्दगी बीत जाती है दो वक्त की रोटी कमाने में,  पर पेट भी ढंग से नही भरता इस महँगाई के जामने में.



जिन्दगी बीत जाती है दो वक्त की रोटी कमाने में,

पर पेट भी ढंग से नही भरता इस महँगाई के जामने में.


Jindagee Beet Jaatee Hai Do Vakt Kee Rotee Kamaane Mein, 

Par Pet Bhee Dhang Se Nahee Bharata Is Mahangaee Ke Jaamane Mein.



Do Waqt Ki Roti Shayari, जज्बातों को उसने दौलत से तोल दिया,  जब वो दो वक्त की रोटी की कीमत बोल दिया।



जज्बातों को उसने दौलत से तोल दिया,

जब वो दो वक्त की रोटी की कीमत बोल दिया। 


Jajbaaton Ko Usane Daulat Se Tol Diya, 

Jab Vo Do Vakt Kee Rotee Kee Keemat Bol Diya.



ख्वाहिशों की कतार बड़ी लम्बी है,

दो वक्त की रोटी मिलना आसान नहीं। 


दो वक्त की रोटी कमाने में


कुछ इस कदर अब अपने जीमर जगाएँ,

कि मेहनत करके दो वक्त की रोटी कमाएँ। 



गरीब की चाहत ,

दो वक्त की रोटी और चैन हो ,

हमारी भी किस्मत में हो ,

और तुम्हारी भी किस्मत में हो ।


क्या ताजा क्या बासी ,

ठंडा हो या गर्म ,

दो वक्त की रोटी मिली ,

खुदा का है करम ।


खुदा की रहमत सभी पर बरसे ,

दो वक्त की रोटी के लिए कोई न तरसे ।


कतार बड़ी लम्बी थी ,

के सुबह से रात हो गयी ,

ये दो वक्त की रोटी आज फिर मेरा

अधूरा ख्वाब हो गई ।


मिसाल बन गई उसकी गरीबी जमाने के लिए वो डबल रोटी बेचती है ,

दो वक्त की रोटी कमाने के लिए ।


 

दो वक्त की रोटी कभी दो वक्त के लाले ,

गरीब की तकदीर में क्या बसा ए मोहब्बत क्या आरजू

ए  निवाला ।


Do Waqt Ki Roti Shayari

 

जिन्दगी लगे भरम ,

जिन्दा रहना अहम ,

दो वक्त की रोटी किस्मत

दे करम…


दो वक्त की रोटी कमाता हूँ ,

दो वक्त भगवान की पूजा करता हूँ ,

इससे ज्यादा मेरी जरूरत नही

और मुझे खरीदने की तेरी औकात नही ।


बादशाहों के सर ,

चाहे न कोई ताज हो ,

दो वक्त की रोटी को कोई न मोहताज हो ।


 

मिलती नही सब लोगो को ,

दो वक्त की रोटी ,

सो जाते है जमीं पर ,

कोई चिन्ता नही होती ।


 

दो वक्त रोटी रब सबको देता है ,

फिर क्यों बन्दा दिल का दर्द सहता है ।


मिल जाये अगर सभी को ,

दो वक्त की रोटी ,

तो फिर मिले कैसे ,

पांच साल की गद्दी ।


दाल रोटी शायरी

Dal Roti Shayari, सारे वजन उठा के देख लो ,  दाल, रोटी ही सबसे भारी है।
दाल रोटी शायरी



सारे वजन उठा के देख लो ,

दाल, रोटी ही सबसे भारी है।


Saare Vajan Utha Ke Dekh Lo , 

Daal, Rotee Hee Sabase Bhaaree Hai.



अक्षरों के भिगो के थोड़े चावल,

मात्राओं की हरी दाल मिलाता हूँ,

नमक, राई, और घी के शे'रों से,

ग़ज़ल वाली खिचड़ी बनाता हूँ!!


Aksharon Ke Bhigo Ke Thode Chaaval, 

Maatraon Kee Haree Daal Milaata Hoon, 

Namak, Raee, Aur Ghee Ke Sheron Se, 

Gazal Vaalee Khichadee Banaata Hoon!!



वो मेरा कितना ख़याल रखते हैं.

सामने मेरे बेतुके सवाल रखते हैं,

इतने आँसू पी चुका हूँ अब तक मैं

खाने में बिनौ नमक की दाल रखते हैं।


Vo Mera Kitana Khayaal Rakhate Hain. 

Saamane Mere Betuke Savaal Rakhate Hain, 

Itane Aansoo Pee Chuka Hoon Ab Tak Main 

Khaane Mein Binau Namak Kee Daal Rakhate Hain.



वो इश्क़ ही क्या गर जुद़ाई ना मिले ,

आशिक हैं जी

Hostel की दाल नहीं जो हर रोज मिले ।॥


Vo Ishq Hee Kya Gar Judaay Na Mile , 

Aashik Hain Jee 

Hostail Kee Daal Nahin Jo Har Roj Mile ..



तेरे हुस्न की दाल में पड़ने वाला तड़का हूं में,

तू भूखी लड़की; जोमैटो वाला लड़का हूं मैं।


Tere Husn Kee Daal Mein Padane Vaala Tadaka Hoon Mein, 

Too Bhookhee Ladakee; Jomaito Vaala Ladaka Hoon Main.



अपना मिलन है मधुर स्वर्णिम,देखो ना चलाओ चाल प्रिये!

मैं गेंहू की रोटी हूं और तुम अरहर की दाल प्रिये !


बीवी के सामने मेरी दाल नहीं गलती।

इसलिए लीटते वक्त सब्जी ले आता हूँ।


सब्ली बहुत हैं महँगी आजकल, भाव तुम जेंसे बढ़ गया इसका,

रहने दो मत करो तकलीफ़, खा लेंगे हम दाल उबाल कर।।


मुद्दा ये नहीं है की दाल महंगी है।

दर्द ये है कि किसी की गल नहीं रही है ।।


बचपन में बहुत उड़ता था मै

पर अब दाल रोटी ने मेरे पैरों में बेड़ियाँ डाल दी हैं।

शायद कोई जिंदा ख़्वाब अपने पूरा होने की तपिश

से इनको पिघला पाएगा।


मुझे मेरी थाली में दो रोटी और दाल चाहिए ,

अच्छे दिन के लिए और कितने साल चाहिए।


बाटी में घी का ,

दाल में नीबू का ,

चूरमे में बूरे का ,

और जीवन में हीरे का ,

बड़ा ही महत्त्व है। 


वो मिले भी तो भंडारे में बाल्टी पकड़े हुए ,

अब दिल माँगते या दाल ,

हाय रे मेरे हमसफर।


रोटी कमाने पर शायरी

रोटी कमाने पर शायरी, ऐ मेरे दोस्त ,  पसीना तो बहाना ही पड़ता है ,  रोटी कमाने के लिए और रोटी पचाने के लिए ।
रोटी कमाने पर शायरी



ऐ मेरे दोस्त ,

पसीना तो बहाना ही पड़ता है ,

रोटी कमाने के लिए और रोटी पचाने के लिए ।


Ai Mere Dost , 

Paseena To Bahaana Hee Padata Hai , 

Rotee Kamaane Ke Lie Aur Rotee Pachaane Ke Lie .



रोटी कमाने पर शायरी, मेरे खुदा ने आज ये कैसा कमाल कर दिया,  रोटी कमाने निकला तो सिर पर ताज रख दिया।



मेरे खुदा ने आज ये कैसा कमाल कर दिया,

रोटी कमाने निकला तो सिर पर ताज रख दिया। 


Mere Khuda Ne Aaj Ye Kaisa Kamaal Kar Diya, 

Rotee Kamaane Nikala To Sir Par Taaj Rakh Diya.



रोटी कमाने पर शायरी , बेचने पड़ते है ख्वाब ,  ‘ रोटी ’ कमाने के  लिए ।



बेचने पड़ते है ख्वाब ,

‘ रोटी ’ कमाने के  लिए ।


Bechane Padate Hai Khvaab , 

‘ Rotee ’ Kamaane Ke Lie .



रोटी कमाने पर शायरी, गरीब दिन भर भटकता है रोटी कमाने के लिए ,  अमीर तो अमीर है ,  वक्त नही है उसके पास रोटी भी  खाने कि लिए ।



गरीब दिन भर भटकता है रोटी कमाने के लिए ,

अमीर तो अमीर है ,

वक्त नही है उसके पास रोटी भी

खाने कि लिए ।


Gareeb Din Bhar Bhatakata Hai Rotee Kamaane Ke Lie , 

Ameer To Ameer Hai , 

Vakt Nahee Hai Usake Paas Rotee Bhee 

Khaane Ki Lie .



गरीब की रोटी शायरी


जिन्दगी मिली तो हमें कुछ यूं मिली , 

जैसे खैरात में हो गरीब को एक रोटी मिली ।


Jindagee Milee To Hamen Kuchh Yoon Milee , 

Jaise Khairaat Mein Ho Gareeb Ko Ek Rotee Milee .



खुले आसमां के नीचे सोकर भी अच्छे सपने पा लेते है ,

हम गरीब है साहब ,

थोड़े सब्जी में भी 4 रोटिया खा लेते है ।


Khule Aasamaan Ke Neeche Sokar Bhee Achchhe Sapane Pa Lete Hai , 

Ham Gareeb Hai Saahab , 

Thode Sabjee Mein Bhi 4 Rotiya Kha Lete Hai .




गरीबी की भी बड़े अदब से हंसी उड़ाई जाती है,

इक रोटी देकर हजारों तस्वीर खिचवाई जाती है। 


Gareebee Kee Bhee Bade Adab Se Hansee Udaee Jaatee Hai, 

Ik Rotee Dekar Hajaaron Tasveer Khichavaee Jaatee Hai.



जिंदगी में कभी ख़ुशी इस कदर ना मिले,

जैसे खैरात किसी गरीब को रोटी मिले। 


Jindagee Mein Kabhee Khushee Is Kadar Na Mile, 

Jaise Khairaat Kisee Gareeb Ko Rotee Mile.



अमीरी की चाह कोठी तक,

गरीबी की चाह रोटी तक। 


Ameeree Kee Chaah Kothee Tak, 

Gareebee Kee Chaah Rotee Tak.


 

गरीबों की रोटी छीनकर जो काला धन बटोरते है ,

वो अपने बच्चो को उन्ही पैसे से जहर परोसते है ।


गरीबों की रोटी के बारे में सोचता कौन है?

स्वार्थ सबके चेहरे पर दिखती है सब मौन है। 


अमीर की चाह कोठी तक ,

गरीब की चाह रोटी तक

रोजी रोटी ने इस कदर बांधा ,

जिंदा रहने का गुमां भी जिन्दा न रहा ।


जीत हासिल करनी हो तो अपनी काबिलियत बढाओ ,

वरना नसीब की रोटी तो कुत्तों को भी हासिल होती है। 



वो रोटी चुरा के चोर हो गया,

लोग मुल्क खा गए, कानून लिखते लिखते !!


इश्क है रोटी पकाने जैसा,

जिंदगी हाथ जला बैठी...!!


जद्दोज़हद ही रोटी की है...

इश्क़ में तो जंग होती है ज़माने से !!


मैं चाहता हूँ वह मेरे जबीं पे बोसा दे,

मगर जली हुई रोटी को कौन घी लगाता है। 



रोटी को ढूंढता कूड़े के ढेर पर,

देखा है मैंने एक चाँद का टुकड़ा ज़मीन पर। 



घुस जाते हैं झरोखों से दस्तक दिए बगैर ,

दिल में रहने वाले मेहमान कुछ बेईमान हुआ करते हैं ।


रोटी का आकार पहिये की तरह होता है ,

तभी लोग भटकते है रोटी की खातिर ।



खुशी मिली तो हमें कुछ यूं मिली ,

जैसे चंद लम्हात के लिए हो जिन्दगी मिली , 

सुबह से शाम तक सैकड़ो पिज्जा पहुंचाता है ,

तब जाकर परिवार को वो रोटी खिलाता है ।



इक रोटी की भूख किसी को कभी सतायें ना,

सतायें तो मेहनत करे, रोटी के लिए हाथ फैलायें ना। 



ग़रीब भूख मिटाने को रोटी लेकर भाग गया,

बड़े दिनों बाद लगता है पूरा भारत जाग गया। 

साहब और नेताओं की चोरी सबको दिखती है ,

लेकिन डर उस वक्त सबकी जुबान सिलती है। 


Roti Kavita Hindi

ये रोटी बड़े मेहनत से बनती है,

पहले गेंहूँ की फसल काटी जाती है,

उसे धोया जाता है, सुखाया जाता है,

पीसा जाता है, गूथा जाता है,

बेला जाता है, पकाया जाता,

इसके बाद इसे खाया जाता है। 



दाल भात खा कर अब मैं तंग आ गया ,

हाँ रोटी देखे मुझे एक ज़माना हो गया। 


भूख से बड़ी कोई मजबूरी नही होती और ,

रोटी से बड़ी कोई ताकत नही होती। 

 

 हराम की रोटी किसी को डरते नहीं और ,

मेहनत की रोटी कभी रुकती नही। 



ठंडी रोटी आप ही को मिलती है, जो अपने ,

घरवालो के लिए गर्म रोटी लेने जाते है। 


सुबह से शाम तक सैकड़ो पिज्जा पहुंचाता है ,

तब जाकर परिवार को वो रोटी खिलाता है ।


रोटी की कीमत शायरी


किस्तम की रोटी तो मिल ही जाती है ,

पर इज्जत की रोटी पाने के लिए कीमत चुकानी पड़ती है ।


Kistam Kee Rotee To Mil Hee Jaatee Hai , 

Par Ijjat Kee Rotee Paane Ke Lie Keemat Chukaanee Padatee Hai .



वो करते नही अब जिद खिलौने की ,

क्योकि समझने लगै है वो कीमत रोटी की ।


Vo Karate Nahee Ab Jid Khilaune Kee , 

Kyoki Samajhane Lagai Hai Vo Keemat Rotee Kee .



 वो करते नही अब ज़िद खिलौनों की,

क्योंकि समझने लगे है वो कीमत रोटी की।।


Vo Karate Nahee Ab Zid Khilaunon Kee, 

Kyonki Samajhane Lage Hai Vo Keemat Rotee Kee..



दो जून की रोटी खाने से किस्मत खुल जाती है ,

क्योकि साल में यह सिर्फ एक बार आती है ।


Do Joon Kee Rotee Khaane Se Kismat Khul Jaatee Hai , 

Kyoki Saal Mein Yah Sirph Ek Baar Aatee Hai .



सेंकते रहते हो अपनी उम्मीदो की रोटी .

मेरी बेचैनियाँ तुम्हे आग नजर आती है ।


Senkate Rahate Ho Apanee Ummeedo Kee Rotee . 

Meree Bechainiyaan Tumhe Aag Najar Aatee Hai .

 


अब तो उसके हाथ की रोटी भी अच्छी नही लगती ,

वो हमारे निकपिल की तरह सच्ची नही लगती ।


Roti Ki Keemat Shayari

भूख इक एहसास है जिसे रोटी मिटाती है,

पर मोहब्बत के बिना ये जिन्दगी अधूरी रह जाती है। 



जिन्हें पता होती है कीमत रोटी की,

वो बच्चे जिद नही करते है खिलौने की। 


चाय ठंडी रोटी ही क्यों ना हो बस ,

टाइम पे मिल गई हम तो उसी में खुश हैं। 

 


ये भगवा चाहे तू हमें भूखे रखले, पर ,

किसी इंसान को भूखे पेट मत सोने देना। 



खींच लाता है गांव में बड़ों का प्यार ,

छाछ  गुड़ के साथ गेहूं की रोटी का स्वाद। 



सांझ भी मुन्ताजिर है ,

तेरी झलक पाने को ,

ऐ चांद जल्दी आजा ,

साथ रोटी खाने को ।


Roti Par 2 Lines


मुझसे ना पूछा कीजिए ये खुदाओ की बातें ,

बात रोटी की हो तो हुलिया पहचानता हूँ मै ।


 

बिकती है बोटी ,

तो मिलती है रोटी ,

दुनिया बड़ी पर ,

इंसानियत है छोटी ।



भूख का रिश्ता सिर्फ़ रोटी से है,

चमकती थालियाँ भूख नहीं मिटाती। 



काश कोई रोटी डे भी होता तो लोग भूख ,

से मरते लोगों को  रोटियां बाटी जाती। 



दाल भात खा कर अब मै तंग आ गया ,

हाँ रोटी देखे मुझे एक जमाना हो गया ।


 

वो जिस्म बेचकर रोटी लाती रही ,

भीड़ उसे बदनाम कर रही थी ,

और उसका घर चलती रही ।


 

खूब गुड़ रख लेती हूँ रोटी पर ,

जब मां की रोटी याद आती है ।


 

किस्मत की लकीरें नही थी उसके हाथों में ,

माथे पर पसीना ,

उसकी रोटी का गवाह था ।


 

जिस दिन पेट को रो रोटी नसीब हो जाती ,

बिना चांद का दीदार किये मेरी ईद हो जाती ।


 

आप जश्न के नशें में गिरे पड़े थे आज सवेर में ,

मै कल रात भी रोटी ढूंढने निकला कचरे के ढेर में ।


 

जल रही है कब से ,

मुसीबतो के आंच पर ,

कोई आकर मेरी जिन्दगी

की रोटी पलट दे ।


 

भूख का रिश्ता सिर्फ रोटी से है ,

चमकती थालियाँ भूख नही मिटाती ।


 

वक्त इंसान को क्या-क्या ना सिला देता है ,

मौत मिल जाती है , रोटी की तलब में अक्सर ।


 

हाथ में रोटी लिए उसने हंस के पूछा ,

किस धर्म से ताल्लुक रखते हो ?

उस भिखारी ने भी रो के कहा ,

जिस धर्म के नाम से वो रोटी मिल जाये ।


 

वो खा गया सूखी रोटी कड़वे प्यार के साथ ,

भूख ने जो सताया था मुफलिसी के साथ ।


 

बहुत गिर लिए ,

अब जमीर जगाएं ,

खत्म हुए चुनाव चलो

रोटी कमाएं ।


 

तवे पर खुद को तैयार कर लेती है ,

रोटियां जलकर श्रृंगार कर लेती है ।


जिस भगवान के नाम पर मुझे रोटी मिले,

उस रोटी में मुझे हर पल भगवान दिखे। 


परिश्रम करके रोटी कमाना सिखाती है,

शिक्षा कभी भी बेकार नही जाती है। 


आज खाने में चावल नही, बस रोटी पकाई है,

दो जून की रोटी बड़ी मुश्किल से मिल पाई है। 


दो जून की रोटी खाने से किस्मत खुल जाती है,

क्योंकि साल में यह सिर्फ एक बार आती है। 


भूख के दर्द को कहाँ समझती है ये दुनिया,

रोटी के चोर को सिर्फ चोर समझती है ये दुनिया।


गरीबों की रोटी छीनकर जो काला धन बटोरते है,

वो अपने बच्चों को उन्हीं पैसे से जहर परोसते है। 


जिन्दगी में कभी खुशी इस कदर ना मिले ,

जैसे खैरात किसी गरीब को रोटी मिले ।


गरीब भूख मिटाने को रोटी लेकर भाग गया ,

बड़े दिनो बाद लगता है पूरा भारत जाग गया ,

साहब और नेताओ की चोरी सबको दिखती है ,

लेकिन डर उस वक्त सबकी जुबान सिलती है ।


ताज़ी रोटियाँ हमे स्वस्थ रखती है,

इस ब्रेड ने पूरे शहर को बीमार कर रखा है। 


मेहनत की रोटी में ही स्वाद होता है,

वरना पूरा जीवन ही बेस्वाद होता है। 



रोटी किसी मां की कभी ठंडी नही होती ,

मैने फुटपाथ पे भी जलते हुए चुल्हे देखे है ।



जीत हासिल करनी है ते काबिलियत बढ़ाओ ,

किस्मत की रोटी ते कुत्तो को भी नसीब होती है ।


 

सभी के पेट को रोटी ,

बदन पर कपड़े ,

सर पर छत ,

बहुत अच्छे है ये

सपने मगर सच्चे नही होती ।


 

घुटन क्या चीज है ये पूछिए उस बच्चे से ,

जो काम करता है “ रोटी ” के लिए खिलौनों की दुकान पर ।


इक रोटी की भूख कभी किसी को सताये ना ,

सताये तो मेहनत करें ,

किसी के सामने हाथ फैलाये ना ।


निवाले-निवाले को तरसते मुहाजिरो के हाथ ,

ए खुदा ऐसा कभी न हो किसी के भी साथ ।


 

भूख से बड़ा ‘ मजहब ’ और रोटी से बड़ा ‘ ईश्वर ‘

कोई हो तो बता देना ,

मुझे भी “ धर्म ” बदलना है ।


 

गर्म रोटी खाये निकम्मा जो ना बिस्तर छोड़े

मेहनत कर जो आये घर को सुखी रोटी तोड़े ।


 

ठंडी रोटी अक्सर उनके ही नसीब में होती है..

जो अपनों के लिए कमाई करके देर से घर लौटते है ।


 

चाहे सूखी रोटी ही क्यो न हो ,

अपने श्रम से अर्जित भोजन से मधुर और कुछ नही होता ।


भूख के दर्द को कहाँ समझती है ये दुनिया ,

रोटी के चोर को सिर्फ चोर समझती है ये दुनिया ।


 

रूखी रोटी को भी बांट कर खाते हुए देखा मैने ,

सड़क किनारे वो भिखारी शहंशाह निकला। 

 

खींच लाता है गांव में बड़े बूढ़ो का आर्शीवाद ,

लस्सी गुड़ के साथ बाजरे की रोटी का स्वाद ।


 

काश कोई रोटी डे भी होता ,

तो लोग भूख से बिलखते लोगो को रोटी बांटते ।

 

कोई परेशान है कुर्सी के लिए ,

कोई ख्वाहिश के लिए और

एक किसान परेशान है ,

उधार के किश्तो

और रोटी के लिए ।


 


भगतसिंह , सुखदेव ,

मै इन फिरंगियो की सूखी रोटियों का

मोहताज नही ,

मुझे भूख फकत स्वराज की है ।


चूल्हे की रोटी शायरी


मै कई दफा चूल्हे के आगे से भूखा उठा हूँ ,

ऐ रोटी आपना पता बता मुझे ,

जहां तू बर्बाद होती है ।


 

फेक रहे तुम खाना क्योकि आज रोटी थोड़ी सूखी है ,

थोड़ी इज्जत से फेंकना साहब ,

मेरी बेटी कल की भूखी है ।

Do Waqt ki Roti Shayari

 

रोटी को ढूंढता कूड़े ते ढेर पर ,

देखा है मैने एक चांद का टुकड़ा जमीन पर ।


गरीबी की भी बड़े अदब से हंसी उड़ाई जाती है ,

एक रोटी देकर 100 तस्वीर खिचवाई जाती है ।



गरीब का रिश्ता बस ,

भूख से होता है ,

एक रोटी भी मिल जाए

उसमें भी सूकून होता है ।


 

 

अगर जली हुई रोटी खाकर भी तुम खुश हो  ,

तो तुमने सच्चे मायने में प्यार किया ।


 

दाग जाते नही कभी मां की रोटी से ,

उफ्फा वो कितनी मेहनत करती है ।


 

दो जून की रोटी खाने से किस्मत खुल जाती है ,

क्योकि साल में यह सिर्फ एक बार आती है ।

 

 

जवां हुआ हूँ सबसे ,

सजदे ही कर रहा हूँ ,

दादी ने कहा था कभी,

रोटी ही खुदा है ।



मेहनत की रोटी में ही स्वाद होता है ,

वरना पूरा जीवन ही बेस्वाद है ।


 

रोटी को हाशिये पर धकेल ,

तवे सत्ताधीश हो गये ,

भूख को जलते रहे वो ,

आग उसकी बुझने तलक ।


 

कई दिनों से भूखा था ,

मैने रोटी को देखा ,

कल तुम्हारी गली से गुजरा था ,

मैने तुमको देखा ।


कोई अपनो के लिए मुंह की रोटी भी छीन देता है ,

पर इस दुनिया को क्या कहें ,

जहां कोई रोटी के लिए अपनो को ही छोड़ देता है ।



जाने क्यों कुछ कम मुझे अब भूख लगती है ,

है जबसे सुना की शायरी रोटी नही देती ।


 

मिलती नही रोटी उसे ,

जिसका लिखा है नाम ,

न्याय की तलाश में ,

भटकते रहे श्रीराम ।


 

रोटी का आकार गोल नही ,

बल्कि प्रश्नचिन्ह जैसा होना चाहिए था ,

क्योंकि रोटी ही प्रशन है

बहुतो के जीवन का ।


 


Roti Status in Hindi 

भरा हो पेट तो रोटी में भी चांद नजर आता है और

जब पेट भरना हो तो चांद भी रोटी नजर आता है ।


 

हाथों से थमाकर मीठा वो कड़वा सुना गये ,

खायी थी उसकी एक रोटी,

वो मेरा सारा खाना खा गये ।


 

रिश्तो की रोटी अगर एक ओर से ही सेकी जाए तो ,

हमेशा कच्ची ही रह जाती है ।


 

भूख इक एहसास है जिसे रोटी मिटाती है ,

पर मोहब्बत के बिना ये जिन्दगी अधूरी रह जाती है ।


 

सोया आज भी रोटी के हर्फ के बिना ,

हाल किसका बताऊं अपना या अपनी मुफलिसी का। 


भूखे बच्चे शायरी


धर्म के नाम पर राजनीति की रोटी सेकने वाले

कभी धर्म के नाम पर रोटियां भी बांटतर देखे ,

भूखे को भोजन मिल जाएगा ,

और उन्हे दुआए ।


Dharm Ke Naam Par Raajaneeti Kee Rotee Sekane Vaale 

Kabhee Dharm Ke Naam Par Rotiyaan Bhee Baantatar Dekhe , 

Bhookhe Ko Bhojan Mil Jaega , 

Aur Unhe Duae .


 

मौला मेरे हिस्से की रोटी कम कर दे ,

मगर किसी भूखे का पेट भर दे ।


Maula Mere Hisse Kee Rotee Kam Kar De , 

Magar Kisee Bhookhe Ka Pet Bhar De .



गुनाहो की दुनिया में मेने भी पैर रखा हैं।

खाली इस पेट में कुछ निवाले डालने के लिए


Gunaaho Kee Duniya Mein Mene Bhee Pair Rakha Hain. 

Khaalee Is Pet Mein Kuchh Nivaale Daalane Ke Lie



क़िस्मत की लक़ीरे नहीं

थीं उसके हाथों में,

माथे पर पसीना,

उसकी रोटी का गवाह था


जिस दिन पेट को दो रोटी नसीब हो जाती।

बिना चाँद का दीदार किये मेरी ईद हो जाती।


मोहब्बत से भरता गर पेट तो ये

रोटी की बातें क्यों लिखनी पड़ी हैं।


वक़्त इंसान को , क्या-क्या ना सिला देता है।

मौत मिल जाती है, 'रोटी' की तलब में अक्सर


क्या ताज़ा, क्या बासी, ठंडा हो, या गर्म

दो वक़्त की रोटी मिली, ख़ुदा का है करम


हाथ में रोटी लिए उसने हँस के पूछा,

"किस धर्म से ताल्लुक रखते हो?"

उस भिखारी ने भी रोके कहा,

"जिस धर्म के नाम से वो रोटी मिल जाये!"


तो दोस्तों जो हमने ऊपर आप लोगों को दी है शायरी रोटी से रिलेटेड या यह कहें कि रोटी पर बनी बहुत सारी शायरियां s.m.s. टेक्स्ट आदि।


वह आप लोगों को काफी पसंद आए होंगे अगर आप लोगों को पसंद आएगा तो हम अपने फेसबुक अकाउंट पर स्टाग्राम अकाउंट पर व्हाट्सएप पर आगे शेयर कर सकते हो धन्यवाद।


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